भारत सरकार ने आयकर विधेयक 2025 पेश किया है, जिसका उद्देश्य कर चोरी पर नकेल कसना और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs), जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी और NFTs, पर सख्त निगरानी रखना है। इस नए कानून के तहत, अघोषित क्रिप्टो संपत्तियों की जांच के लिए अधिकारियों को ईमेल और व्हाट्सएप चैट तक पहुँच दी जा सकती है।
इस लेख में हम इस कानून के प्रभाव, कानूनी प्रावधानों, क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के लिए खतरे, और आने वाले संभावित बदलावों पर चर्चा करेंगे।
आयकर विधेयक 2025 में क्रिप्टोकरेंसी पर नए नियम
- क्रिप्टो पर टैक्स दर बरकरार
नया विधेयक 2025 क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर 30% फ्लैट टैक्स को बनाए रखता है। साथ ही, 1% TDS का प्रावधान भी जारी रहेगा, जो ₹10,000 से अधिक की ट्रांजेक्शन पर लागू होता है
- अघोषित क्रिप्टो होल्डिंग्स पर 70% तक पेनल्टी
अगर कोई व्यक्ति अपनी क्रिप्टो संपत्तियों को कर अधिकारियों से छिपाने की कोशिश करता है, तो उसे 70% तक का जुर्माना देना पड़ सकता है
। यह नियम पिछले चार वर्षों तक लागू हो सकता है, यानी पुराने ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा सकती है।
- अधिकारियों को डिजिटल डेटा तक पहुँच
सरकार ने आयकर अधिनियम में संशोधन कर धोखाधड़ी की आशंका वाले मामलों में अधिकारियों को डिजिटल डेटा, ईमेल और व्हाट्सएप चैट तक पहुँच की अनुमति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी और अवैध क्रिप्टो लेन–देन की पहचान करना है।
- अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंजों की निगरानी
अब भारतीय कर अधिकारी बिनांस (Binance), बायबिट (Bybit) और अन्य अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर भी नजर रखेंगे। कई एक्सचेंजों को भारत में कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है और कुछ ने अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं
आयकर अधिकारियों को डिजिटल डेटा तक पहुँच क्यों दी गई?
- टैक्स चोरी रोकने के लिए
कई भारतीय निवेशक अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स को गुप्त रखते हैं और कर भरने से बचते हैं। सरकार को इससे भारी नुकसान होता है, इसलिए कठोर निगरानी प्रणाली लागू की गई है
- अवैध गतिविधियों पर रोक
क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद वित्तपोषण और अवैध लेन–देन के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों को डेटा तक पहुँच देने से ऐसी गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा
- विदेशी एक्सचेंजों पर नियंत्रण
अब भारतीय कर विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी भारतीय नागरिक विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों का उपयोग कर कर चोरी न करे। इसके लिए सरकार क्रिप्टो एक्सचेंजों से अनिवार्य रिपोर्टिंग की मांग कर रही है
क्रिप्टो निवेशकों के लिए खतरे और चुनौतियाँ
- निजता का उल्लंघन:
अधिकारियों को ईमेल और चैट तक पहुँच देने से डेटा सुरक्षा और निजता पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। - क्रिप्टो मार्केट पर नकारात्मक प्रभाव:
भारतीय निवेशकों पर बढ़ते कर बोझ और सख्त नियमों के कारण क्रिप्टो ट्रेडिंग में गिरावट आ सकती है। - बैकडेटेड जांच:
पिछले चार वर्षों के लेन–देन की भी जाँच की जा सकती है, जिससे कई पुराने निवेशकों को दिक्कतें हो सकती हैं। - पेपरवर्क और अनुपालन बढ़ेगा:
अब हर निवेशक को सभी क्रिप्टो लेन–देन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा, जिससे अनुपालन लागत बढ़ सकती है।
क्या यह नियम कानूनी चुनौतियों का सामना करेगा?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान संविधान के निजता के अधिकार (Right to Privacy) के खिलाफ है और इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। हाल ही में क्रिप्टो कम्युनिटी और कानूनी विशेषज्ञों ने इस नियम के खिलाफ विरोध जताया है
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